Friday, 15 January 2016

पंछी

पंछी, बचपन में कितना बुरा लगता था यह नाम और आज जब इस रिश्ते से आजाद हुई हूँ तो पंछी की तरह उड़ना चाहती हूँ
किस की गलती थी ??
कितना रोये होंगे माँ पापा ?? दो दिन तक बरसात नहीं रुकी थी।
दादा , कैसे नज़र मिला पाये होंगे वो मेरे पापा और अपने सबसे करीबी दोस्त से, 
क्या कहा होगा ?? 
पापा या सुनील ??
तुम्हारी बेटी, मेरी बीवी या मेरी कातिल ??

आज अधूरे सपनो को कागज पर लिख कर बेचा तो लगा जेल के वह १० बरस मुझे आज़ाद कर गए

http://oneframestories.com/ofs.php?id=66

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